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डा. सूर्यप्रसाद यादव,
हजारौं भाषा र तिनका भाषिका भएको दक्षिण एसिया विश्वकै अगुवा बहुभाषी क्षेत्र हो । दक्षिण एसियाको सानो हिमाली राज्यका रूपमा अवस्थित नेपाल पनि बहुभाषिकताको अवस्थाबाट वञ्चित छैन । यहाँ विद्यमान सांस्कृतिक, पर्यावरणीय तथा जैविक विविधता अनुरूपकै भाषिक विविधता पनि छ ।
जसको विवरण नेपालको राष्ट्रिय जनगणना २००९/११ देखि मात्र भेटिन्छन् । जवकि नेपालमा जनगणनाको सुरूवात १९६८ (१९११ ई.) बाट भएको हो । नेपालको पछिल्लो राष्ट्रिय जनगणना २०७८ अनुसार देशभरिमा जम्मा १२४ वटा मातृभाषाहरू भेटिएका छन्, जसमध्ये मधेश प्रदेशमा मात्र ६० भन्दा बढी मातृभाषाहरू बोलिन्छन् । तालिका १ मा मधेश प्रदेशमा बोलिने मातृभाषाहरूको सङ्ख्या प्रस्तुत गरिएको छ र यसअघि मधेश सरकारको कामकाजी भाषा समबन्धि प्रस्तावको सूचीमा परेका भाषाहरूको नाम तथा संख्या हाइलाइट गरिएको छ ।
तालिका १: मधेश प्रदेशमा बोलिने भाषाहरू
| क्र.स. | मातृभाषा
(Mother tongue) |
दोस्रो भाषा
(Second language) |
|
| १ | मैथिली | २५५१९१७ | १७२४५५ |
| २ | भोजपुरी | ११४९९६२ | १०४५४३ |
| ३ | बज्जिका | ११२७२५५ | ८५०५७ |
| ४ | नेपाली | ३५२१०९ | ५३३३४८ |
| ५ | थारु | २५४६८५ | १३९७७ |
| ६ | उर्दू | २४९६१४ | ३७६८६ |
| ७ | मगही | २१५२३६ | २७१५६ |
| ८ | तामाङ | १००६६९ | ४०४६ |
| ९ | मगर ढुट | ४४३८५ | २४७१ |
| १० | हिन्दी | १४२३२ | ८७२१८ |
| ११ | नेपालभाषा(नेवारी) | १२७९० | ७१० |
| १२ | दनुवार | ८५३० | ८५ |
| १३ | उराउँ (कुडुख) | ५२९६ | ११ |
| १४ | माझी | ४७३६ | ३२६ |
| १५ | राई | ४६७६ | १३२ |
| १६ | मुसलमान | ४४०३ | ४९२४ |
| १७ | मारवाड़ी | ३९२६ | ८९८ |
| १८ | गुरुङ | १३३४ | ७११ |
| १९ | अवधी | १०२२ | १२०९७ |
| २० | बङ्गला | ८३१ | ४६ |
| २१ | सुनुवार | ७६१ | २६ |
| २२ | भुजेल | ७१६ | ० |
| २३ | संस्कृत | ५६३ | १८९ |
| २४ | खस | ५५६ | ९० |
| २५ | चामलिङ | ५४४ | १५८५ |
| २६ | दुमी | ४११ | ० |
| २७ | थामी | ३९५ | २३४ |
| २८ | मगर खाम | २८८ | ३८५ |
| २९ | घले | २५८ | २६ |
| ३० | वाम्बुले | २४५ | १२ |
| ३१ | लिम्बू | २१७ | १४७५ |
| ३२ | चेपाङ | २१६ | ९८ |
| ३३ | बोटे | १८० | २४ |
| ३४ | पहरी | १५० | ३६ |
| ३५ | डोटेली | १४२ | ५० |
| ३६ | हायु | १४१ | ४४ |
| ३७ | पंञ्जाबी | १०४ | ११४९ |
| ३८ | राजबंसी | ९६ | ६४ |
| ३९ | बान्तवा | ८९ | ६८ |
| ४० | साङ्केतिक भाषा | ६३ | २७ |
| ४१ | जिरेल | ५८ | १८ |
| ४२ | थुलुङ | ५६ | ६४ |
| ४३ | कुमाल | ४९ | ० |
| ४४ | बाहिङ | ४८ | १२० |
| ४५ | अंग्रेजी | ४५ | २१५१ |
| ४६ | जेरो/जरुङ | ४० | ४६ |
| ४७ | सन्थाली | ३७ | १६१ |
| ४८ | तिलुङ | ३६ | १०७ |
| ४९ | सिन्धी | ३६ | १० |
| ५० | शेर्पा | ३२ | १०६ |
| ५१ | बझाङ्गी | २६ | ६९ |
| ५२ | धिमाल | २४ | ० |
| ५३ | दैलेखी | २३ | ६८ |
| ५४ | सामपाङ | २२ | ५८५ |
| ५५ | कोचे | १६ | १२३ |
| ५६ | तिब्बतन | १५ | ३३ |
| ५७ | दराइ | १५ | ० |
| ५८ | अङ्गिका | १२ | १३ |
| ५९ | अछामी | ११ | ४२ |
| ६० | खालिङ | १० | ० |
| ६१ | अन्य | २१५ | १०६ |
| ६२ | नखुलेको भाषा | ३१ | ० |
| जम्मा | ६११४६०० | ||
(स्रोत: राष्ट्रिय जनगणना २०७८)
तलिका १ अनुसार मधेश प्रदेशमा बोलिने मातृभाषाहरूको संख्या साठी भन्दा बढी रहेका छन् । ती भाषाहरू ६१ लाख १४ हजार ६०० मातृभाषीहरूले प्रयोग गरिरहेका छन् । जुन जनसङ्ख्या नेपालको कुल जनसङ्ख्याको २०.९६ प्रतिशत हो । यसरी हेर्दा मैथिली भाषा (२५५१९१७) मधेश प्रदेशको सबभन्दा बलियो र स्थापित भाषा हो । त्यस पछिका भाषाहरू क्रमश भोजपुरी (११४९९६२), बज्जिका (११२७२५५), थारू (२५४६८५), उर्दु (२४९६१४), मगही (२१५२३६), तामाङ (१००६६९) र मगर ढुट (४४३८५) हुन् । हिन्दी भाषा बोल्नेको जनसँख्या १४ हजार २३२ र अंग्रेजी भाषा बोल्नेको जनसँख्या ४५ रहेका छन् ।
सरकारी कामकाजको भाषा
मधेश प्रदेश सरकारले २०८१ माघ ९ गते प्रदेशसभामा दर्ता गरेको ‘सरकारी कामकाजको भाषा समबन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको विधेयक २०८१ अनुसार मधेशमा सरकारी कामकाजको भाषा मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, हिन्दी र अंग्रेजीलाई शिक्षामन्त्रीमार्फत प्रदेशसभामा प्रस्तुत गर्नु भएको थियो । तर इन्टेलेक्चुअल फाउण्डेशन नेपाल लगायत विभिन्न संघसंस्थाहरूको चर्को विरोध गरेपछि सरकार पछि हटन बाध्य भयो र त्यो प्रस्ताव फिर्ता भयो । मधेश सरकारको यो प्रस्ताव बिना मापदण्ड र राजनीतिक प्रेरित थियो भन्ने कुरामा कुनै संदेह थिएन र छैन पनि । तालिका २, ३ र ४ मा मधेश सरकारको सरकारी कामकाजको भाषाको सूचिमा परेका भाषाहरूको अवस्था विभिन्न दृष्टिकोणबाट प्रस्तुत गरिएको छ ।
तालिका २: मातृभाषा र दोस्रो भाषाको अवस्था
| क्र.स. | देश | मधेश प्रदेश | |||
| मातृभाषा | दोस्रो भाषा | मातृभाषा | दोस्रो भाषा | ||
| १ | मैथिली | ३२२२३८९ | २६७६२१ | २५५१९१७ | १७२४५५ |
| (११.०५%) | (०.९२%) | (४१.७३%) | (२.८२%) | ||
| २ | भोजपुरी | १८२०७९५ | १३८५७२ | ११४९९६२ | १०४५४३ |
| (६.२४%) | (०.४८%) | (१८.८०%) | (१.७०%) | ||
| ३ | बज्जिका | ११३३७६४ | ८६०६२ | ११२७२५५ | ८५०५६ |
| (३.८९%) | (०.३०%) | (१८.४३%) | (१.३९%) | ||
| ४ | हिन्दी | ९८३९९ | २२३१०६ | १४२३२ | ८७२१८ |
| (०.३४%) | (०.७६%) | (०.२३%) | (१.४२%) | ||
| ५ | अंग्रेजी | १३२३ | १०२५६१ | ४५ | २१५१ |
| (०%) | (०.३५%) | (०%) | (०.०३%) | ||
(स्रोत: राष्ट्रिय जनगणना २०७८)
तालिका २ अनुसार मैथिली राष्ट्रिय स्तरमा मातृभाषा (११.०५) र दोस्रो भाषा (०.९२ प्रतिशत) को रूपमा नेपाली पछिको पहिलो भाषा स्थापित हुन सफल भएको छ भने प्रदेश स्तरमा मातृभाषा (४१.७३ प्रतिशत) र दोस्रो भाषा (२.८२ प्रतिशत) को रूपमा पहिलो स्थानमा रहेको छ । त्यसैगरी भोजपुरी राष्ट्रिय स्तरमा मातृभाषा (६.२४ प्रतिशत) को रूपमा मैथिली पछिको भाषा भए पनि दोस्रो भाषा (०.४८ प्रतिशत) को रूपमा भने हिन्दी (०.७६ प्रतिशत) भन्दा पछाडी रहेको छ । तर प्रदेश स्तरमा भोजपुरी मातृभाषा (१८.८० प्रतिशत) र दोस्रो भाषा (१.७० प्रतिशत) को रूपमा मैथिली पछिको भाषा हो । त्यसपछिका भाषाहरू बज्जिका, हिन्दी र अंग्रेजी हुन् जसका विस्तृत जानकरी तालिका २ बाट प्राप्त गर्न सकिन्छ ।
तालिका ३: जिल्लागत भाषाको अवस्था
| मातृभाषा | ||||||
| क्र.स. | मैथिली | भोजपुरी | बज्जिका | हिन्दी | अंग्रेजी | |
| १ | सप्तरी | ५६८६९१ | ५३७ | ४४ | १७९३ | ० |
| (८०.५२%) | (०.०७) | (०.००%) | (०.२५%) | – | ||
| २ | सिरहा | ६२५८८७ | २२० | ३१ | २०१० | ० |
| (८४.५८%) | (०.०२%) | (०.००%) | (०.२७%) | – | ||
| ३ | धनुषा | ६९७४६० | ६९१ | ७१७ | २५७७ | ० |
| (८०.३७%) | (०.०७%) | (०.०८%) | (०.२९%) | – | ||
| ४ | महोत्तरी | ५०१३५१ | ५४६ | १२४६३ | १६९९ | ० |
| (७०.९१%) | (०.०७%) | (१.७६%) | (०.२४%) | – | ||
| ५ | सर्लाही | ११७२८६ | ३२४५ | ५०९५८८ | १२१५ | ० |
| (१३.५९%) | (०.३७%) | (५९.०४%) | (०.१४%) | – | ||
| ६ | रौटहट | ३०९७४ | २६६८४ | ५८९३०६ | ८६३ | १९ |
| (३.८०%) | (३.२७%) | (७२.४३%) | (०.१०%) | (०.००%) | ||
| ७ | बारा | २८९७ | ५६३६६४ | १३२४५ | ७१३ | ० |
| (०.३७%) | (७३.८६%) | (१.७३%) | (०.०९%) | – | ||
| ८ | पर्सा | ७३७१ | ५५४३७५ | १८६१ | ३३६२ | ० |
| (१.१२%) | (८४.७०%) | (०.२८%) | (०.५१%) | – | ||
(स्रोत: राष्ट्रिय जनगणना २०७८)
तालिका ३ मा हेर्ने हो भन्ने मैथिली सप्तरी, सिरहा, धनुषा, महोत्तरीमा ब्यापक रूपमा बोलिन्छ भने सर्लाहीदेखि क्रमशः वक्तामा कमि आएको देखिन्छ । तर समग्रमा हेर्दा मैथिली मधेश प्रदेशको सबै जिल्लामा लगभग सम्मानजनक रूपमा बोलिन्छ । भोजपुरीको अवस्था भने मैथिली भन्दा केही फरक छ । यो भाषाको प्रभाव मधेश प्रदेशको पर्सा, बारा र रौटहटमा ब्यापक रूपमा रहे पनि पूर्वी जिल्ला सप्तरी, सिरहा, धनुषा, महोत्तरी र सर्लाहीमा त्यति रहेको देखिदैन । तर बज्जिकाको अवस्था भने मैथिली र भोजपुरी भन्दा अलि फरक छ । यो भाषाको प्रभाव मधेश प्रदेशको पूर्वी र पक्षिमी जिल्ला भन्दा पनि बिचका जिल्लामा बढी रहेको देखिन्छ । हिन्दीको भन्ने खासै त्यस्तो प्रभाव मधेश प्रदेशमा देखिदैन् । अंग्रेजी भन्ने नगन्य अवस्थामा रहेको छ । यसरी हेर्दा समग्रमा मैथिली सबभन्दा बलियो र सबल छ र यस पछिका भाषा निसंदेह भोजपुरी हो ।
मैथिली भाषाको बाहुल्य रहेकाले मधेश प्रदेश सरकारको कामकाजको भाषा मैथिली भाषाको बनाए भने सर्वस्विकार्य हुने देखिन्छ । तराई मधेशमा राजनीति गर्ने दलहरुले पनि आफ्नो राजनीतिक मुद्दामा समावेशी समानुपातिक कुरा उठाउने गरेको देखिन्छ । त्यसैले जनसँख्याको हिसाबले पनि मैथिली भाषालाई सरकारी कामकाजको भाषा बनाउनु उपयुक्त हुन्छ जस्तो लाग्छ । अन्य भाषा जस्तो भोजपुरी, बज्जिका, थारु लगायतका भाषाहरु स्थानीय तहमा प्रयोग ल्याउँदा हुन्छ । त्यहाँको सरकारी कामकाजको भाषा त्यो ठाउँमा बोलिने भाषालाई बनाउँदा हुन्छ । विद्यालयहरुमा मातृभाषाको रुपमा ती भाषाहरुलाई प्र्रयोगमा ल्याउन सकिन्छ । पाठ्यक्रममा नै त्यहाँको भाषालाई समावेश गर्दा हुन्छ ।
यो विषयमा जनमत पार्टीका नेता समेत रहनु भएका मधेश प्रदेशका मुख्यमन्त्री सतिश सिंहले पनि स्थानीय तहमा पनि सबै भाषाले अपनत्व पाउने गरी मान्यता दिनुपर्ने भन्नुभएको छ । मधेश प्रदेशमा भाषाको विवाद आउँदा मुख्यमन्त्री सिंहले बीबीसीसँग कुरा गर्दै भन्नुभएको छ, ‘स्थानीयको अपनत्व हुने गरी उनीहरूको भाषा, भेषलाई मान्यता दिने भन्ने सङ्घियताको मर्म हो । निर्णय लेख्दा नेपालीमा लेखिए पनि बोल्दा मैथिलीमा गर्न सकियो भने त्यो पनि अपनत्व भयो । भोजपुरी बहुल क्षेत्र हो भने त्यहाँ भोजपुरीमा नै कामकाज गर्दा सबैलाई हुन्छ ।’
अर्थात जुन भाषाको जहाँ बाहुल्यता छ त्यहाँ उसले अपनत्व महसुस गर्ने सरकारी कामकाजको रुपमा प्रयोगमा ल्याउनुपर्छ । जसरी देशको सरकारी कामकाजको भाषा नेपाली हो, र अरु भाषालाई प्रवद्र्धन गर्न प्रदेश तहमा, स्थानीय तहमा मान्यता दिँदै आएको छ । त्यसरी नै मधेश प्रदेशमा मैथिली भाषालाई सरकारी कामकाजको बनाउनु पर्छ र अन्य भाषालाई त्यहीको स्थानीय स्तरमा व्यापक प्रयोगमा ल्याउनुपर्छ ।
तालिका ४ : पूर्वज भाषाको स्थिति
| पूर्खाको भाषा (Ancestor language) | |||
| क्र.स. | देश | मधेश प्रदेश | |
| १ | मैथिली | २९५९८७६ (१०.१५%) | २२९०८९५ (३७.४५) |
| २ | भोजपुरी | १७६८६१८ (६.०६%) | ११३७६५५ (१८.६०%) |
| ३ | बज्जिका | ११४५९२४ (३.९३%) | ११३८१७९ (१८.६०%) |
| ४ | हिन्दी | ९२२९५ (०.३२%) | १०१६४ (०.१६%) |
| ५ | अंग्रेजी | १२०८ (०.००%) | २२ (०.००%) |
(स्रोत: राष्ट्रिय जनगणना २०७८)


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