यदि वार्ता के प्रति वाकई में इमानदार है और देश में चल रहे आन्दोलन को संबोधन करना चाहती है तो वार्ता का माहौल बनाया जाना चाहिए। इसके लिए कुछ सुझाव पर अवश्य अमल किया जाना चाहिए।
१. मधेश के जिले में किए गए सेना परिचालन के फैसले को तत्काल वापस लेना चाहिए।
२. मधेशरथरूहट में पुलिस प्रशासन द्वारा किए जा रहे दमन को तत्काल बन्द किया जाना चाहिए।
३. कैलाली की घटना और उसके बाद में सेना पुलिस की आड में वहां के स्थानीय जनता के साथ किए गए दुर्व्यवहार और दमन की घटना की सत्य तथ्य बाहर लाने के लिए न्यायिक जांच आयोग गठन की जानी चाहिए।
४. कैलाली से विस्थापित हुए स्थानीय लोगों की सकुशल वापसी और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।
५. कैलाली से राज्य प्रशासन द्वारा बेपत्ता बनाए गए स्थानीय लोगों की अवस्था तत्काल सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
६. सप्तरी, रौतहट, नवररासी और कैलाली में पुलिस की गोली से मारे गए तथा आन्दोलन के दौरान घायल हुए सभी परिवार को तत्काल आर्थिक राहत दिया जाना चाहिए।
७. चार नेताओं की कुंठित मानसिकता से जो संविधान का विधेयक लाया गया है उसे तत्काल वापस ले।
८. संविधान के मसौदे में रहे संघीय संरचना, सीमांकन, नागरिकता, प्रादेशिक अधिकार, समानुपातिक समावेशी अधिकार, जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का जनता की भावना के अनुरूप पुनर्लेखन होना चाहिए।
९. संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा के साथ किए गए ८ बूंदे समझौता के कार्यान्वयन की ठोस प्रतिबद्धता आनी चाहिए।



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