Khadya Bibhag

रिहाई के पीछे का ख़तरनाक सरकारी षड्यंत्र…..

स्वतंत्र मधेश के लिए आन्दोलन चला रहे डा सीके राउत को राज्य विखंडन के आरोप से बरी करने के बाद भले ही उनके समर्थक खुशियाँ मनाए लेकिन खुद डा राउत को अपना हर कदम बहुत ही सोच समझ कर सावधानीपूर्वक उठाना होगा. क्योंकि डा राउत भी अच्छी तरह जानते होंगे कि इस रिहाई के पीछे का सरकारी षड्यंत्र क्या हो सकता है. जिस मधेश के नाम पर वो अपने आन्दोलन को आगे बढ़ा रहे हैं यह नेपाली राज्य सत्ता उनका उपयोग कभी भी, कहीं भी, किसी भी रूप में मधेशी जनता, मधेशी अधिकार, मधेशी पहचान के विरोध में कर सकती है.
भले ही खुद सीके और उनके समर्थकों द्वारा बार-बार लगातार उन्हें जन्म कैद की सजा मिलने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन नेपाल सरकार के ख़तरनाक षड्यंत्र के तहत विशेष अदालत से उन्हें बरी किए जाने का निर्णय आज का नहीं बल्कि एक महीने पहले ही तय किया जा चुका था जिसका जिक्र मैंने उनके कुछ करीबियों को १५ दिन पहले ही कर दिया था. लेकिन मेरा यह विशेष आग्रह है कि खुद सीके राउत या उनके समर्थकों को अब अपनी कार्यशैली बदलनी चाहिए, उनके समर्थकों को अपने भाषा पर संयम रखना चाहिए और सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात कि अनावश्यक और नकारात्मक टीका टिप्पणी से तो उन्हें बचना ही चाहिए.
मधेश के लिए संघर्ष करने का मतलब यह कतई नहीं होता कि दूसरों को हमेशा गाली ही दी जाए. जिस स्वतंत्र मधेश के लिए संघर्ष करने का दावा किया जाता है उसमे उन दलों के योगदान को कभी नहीं भूलना चाहिए जिनके अब तक के संघर्ष के बदौलत वो स्वतंत्रता की बात करने लायक हुए हैं. और उन राजनीतिक नेताओं-कार्यकर्ताओं को भी कोसना बन्द करना चाहिए जो इसी मधेश का एक महत्वपूर्ण अंग हैं.
स्वतंत्र मधेश मांगने का मतलब यह भी कदापि नहीं है कि सिर्फ आप सही और बांकी सब गलत, आप जो कहे, आप जो करे वो सही आपके विचार सही, आपकी भाषा सही और बांकी सब गलत. एक राजनीतिक उद्देश्य के लिए किया जाने वाला संघर्ष में कभी भी गैर राजनीतिक परम्पराओं को हावी होने देने का सीधा सा मतलब है कि हम अपने लक्ष्य से भटक रहे हैं. आप अपना काम कीजिये, अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कीजिये इसके लिए दूसरों की चरित्र हत्या करना, दूसरों के साथ गाली गलौज करना और दुसरों के विचारों का सम्मान नहीं करना गैर राजनीतिक आचरण है जिसे छोड़ना ही होगा.

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