Khadya Bibhag

उपेन्द्र महतोले विस्तारीत बैठकमा राखे यस्तो प्रस्ताव

श्रीमान् अध्यक्ष जी
एवं केन्द्रीय कार्य समिति के बिस्तारित बैठक में सहभागी नेतागण,
केन्द्रीय कार्य समिती, विस्तारित बैठक बीरगंज ।
सद्भावना पार्टी ।

आदरणीय नेतागण,
पिछले कुछ दिनों से देश के राजनीतिक पटल पर मधेशी मुद्दे के पक्ष में, मधेश के आत्म सम्मान और मधेशी जनता की स्वाभिमान के लिए सद्भावना पार्टी और इसके अध्यक्ष आदरणीय श्री राजेन्द्र महतो जी की जो छवि बनी है वह पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया है । एमाले अध्यक्ष के पी शर्मा ओली के द्वारा सम्पूर्ण मधेशीको किए गए दुव्र्यबहार के बाद जिस तरह से सम्पूर्ण मधेशीका एमाले के खिलाफ पार्टी की नीति का साथ और समर्थन मिला है वह चुनाव के बाद पार्टी के नेतृत्व पंक्ति और कार्यकर्ताओं में आए हताशा व निराशा के बाद का सुखद पक्ष है ।
इस समय पूरा देश आन्दोलनमय है । मधेश में आन्दोलन का मुड किस कदर हावी है उसका अंदाजा पिछले कुछ दिनों में मधेश के विभिन्न स्थानों में हुई घटनाओं और उसके प्रतिकृया से स्पष्ट होता है । ऐसे में पार्टी के समक्ष यह बड़ा सवाल है कि सद्भावना पार्टी को लेकर आम मधेशी जनता में जो सकारात्मक छवि बनती जा रही है उसको और आगे कैसे बढाया जाए ? चलरहे आन्दोलन से पार्टी को अधिकतम लाभ कैसे मिले यह हमारे सामने एक बहुत बड़ी चुनौती है ।
एमाओवादी नेतृत्व में होने के बावजूद आन्दोलन का सबसे अधिक असर मधेश में ही देखने को मिलरहा है और मधेश की जनता किसी ना किसी पार्टी के झण्डा तले ही इस बार आन्दोलन करेगी । ऐसे में सवाल यह भी उठता है की पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा कौन सी नीति अपनाने पर भविष्य में यह संगठन के लिए लाभदायी हो सकता है ? पार्टी की केन्द्रीय कार्यसमिति की बिस्तारित बैठक में इन सब मुद्दों पर गहन मंथन कर ठोस नतीजा निकाला जाए तभी हम सभी का यहाँ आना और अपना अपना समय देना सार्थक सावित हो सक्ता है । हम सभी को अपने पिछली गलतियों और अनुभवों से पाठ सीखते हुए मधेश के वर्तमान परिस्थिति का सही सही आकलन करते हुए अपनी भविष्य की रणनीति बनानी होगी ।
ऐसे में पार्टी का एक जिम्मेवार कार्यकर्ता होने के नाते और विभिन्न अनुभवी लोगों से राय विचार कर पार्टी के हित में भावी रणनीति तय करने के लिए कुछ सुझाव देना चाहता हूँ । और मेरा आग्रह है कि आप सभी सकारात्मकरूप से लेतेहुए इन मुद्दों पर गहन चिंतन करते हुए ठोस नतीजा तक अवश्य पहुँचेंगे ।
१. केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक पार्टी बिधान अनुरूप नियमित बुलाई जाए ।
२. आसन्न आन्दोलन में मधेश के हर जिले में पार्टी की दमदार उपस्थिति के लिए अधिकतम कार्यकर्ताओं का परिचालन करने की रणनीति बनाई जाए ।
३. बिभिन्न कालखण्ड मे पार्टी से जुड़े लेकिन किन्हीं कारणों से निष्क्रिय हो चुके कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए ।
४. किसी भी आन्दोलन में युवा और छात्रों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है इस बात को नकारा नहीं जा सकता है, लेकिन दुःख की बात है कि हमारी पार्टी के तरफ से युवाओं और छात्रों के लिए कभी कोई विशेष कार्यक्रम नहीं चलाया जा सका । क्यूँ ना हम इसी आन्दोलन के जरिए युवाओं और छात्रों में अपनी पहुच बनाए । उनको जोड़ने के लिए युवा और विद्यार्थी संगठनो को अधिकार सहित की जिम्मेवारी दी जाए ।
५. किसी भी राजनीतिक दल के विकास और विस्तार के लिए उसके भातृ संगठनों का योगदान भी काफी अहम् होता है । लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि हमारी पार्टी के अधिकतर भातृ संगठन आन्सिक या पूरी तरह से निष्क्रिय हैं । इसके के लिए पार्टी नेतृत्व भी कहीं ना कही दोषी है । यह आने वाला आन्दोलन पार्टी के सभी भातृ संगठनों को पुर्नजीवित करने का एक अच्छा अवसर हो सकता है । मेरा यह मानना है कि पार्टी के सभी भातृ संगठनों को पुनर्गठन कर उसमें योग्य, सक्षम और समर्पित कार्यकर्ताओं को अधिकार सहित जिम्मेवारी दी जाए और अपने अपने संगठन विस्तार तथा भावी कार्यक्रम बताने के लिए समय सीमा तय की जाए ।
६. पार्टी में कार्यकर्ताओं का निष्क्रिय होने में केन्द्रीय नेतृत्व ही जिम्मेदार है । पार्टी में बंद कमरे में बड़े बड़े निर्णयों का करना, पार्टी की गतिविधि के बारे में कुछ ऊपर के ही नेताओं को मालुम होना, नेतृत्व पंक्ति और कार्यकर्ताओं में दुरी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है । पार्टी में सामूहिक नेतृत्व का विकास करना ही होगा । पार्टी का हर छोटा बड़ा फैसला में अधिकतम नेताओं की सहभागिता हो ताकि सभी को अपनी स्वामित्व का एहसास हो ।
७. पार्टी के सभी स्तर के सांगठनिक संरचनाओं में फेरबदल की आवश्यकता है । पार्टी पदाधिकारी से लेकर केन्द्रीय कार्यसमिति तक और भातृ संगठन से लेकर जिला, क्षेत्र, ग्राम और वाड इकाई तक में पदाधिकारियों और अन्य दायित्वों में समावेशी सहभागिता करनी चाहिए । समावेशी करते समय पार्टी में महिला, जनजाति, दलित, मुसलमान सहित सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व हो, सिर्फ नाम के लिए नहीं बल्कि ऐसे लोगों को जोड़ा जाए या ऐसे लोगों को पार्टी की जिम्मेवारी दी जाए जो पार्टी का भविष्य बनाबें ।
८. पार्टीको आमजनमानस से ज्यादा से ज्यादा जोड़ने के लिए ूइल्भ् म्क्ष्क्त्च्क्ष्ऋत्(इल्भ् क्ष्क्क्ग्भ्ू। ‘एक जिला–एक समस्या’ के सुत्र पर काम करना चाहिए ।
अभि चलरहा आन्दोलन में यदी एमाओवादी या संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा के कोई घटक धोका देता है तो पार्टी के रणनीति क्या होगा, तय कर अभि से सुक्षम तरिका से काम किया जाए ।
१०. आनेवाली महाधिवेशन से पार्टी विधान मे ब्यवस्था कर के सभी पद में निर्वाचन करने का प्रावधान किया जाए ।
११. पार्टीको आर्थिकरूप से सवल बनाने के लिए केन्द्र, जिला, क्षेत्र, नगर, ग्राम, वडा स्तर तक लेभीको कडाई के साथ लागु किया जाए ।
जय मातृभूमि ।
उपेन्द्र महतो
केन्द्रीय सदस्य

मितिः २०७१ चैत्र १० गते, बीरगंज

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