दिनांक २०७१ चैत्र १० और ११ गते सद्भावना पार्टी राष्ट्रीय कार्य समिति की विस्तारित वैठक रानीसती धर्मशाला विरगंज मे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजेन्द्र महतो जी के अध्यक्षता मे सम्पन्न हुयी । वैठक मे केन्द्रीय कार्य समिति, सल्लाहकार समिति, संसदीय समिति, अनुशासन समिति, जिला अध्यक्ष, वर्गिय मंच के केन्द्रीय अध्यक्ष सहित दुई सय नेतागण की उपस्थिती रही जिस वैठक मे निम्नानुसार निर्णय किया गया है ।
निर्णय नं. १ ः राजनीतिक प्रस्ताव
संविधान सभा से संविधान निर्माण के दौरान प्रथम संविधानसभा मे दो तिहाई बहुमत की सदस्य संख्या की भावनाओ को कुण्ठित कर कांग्रेस, एमाले जैसी पार्टीयो के संघीयता विरोधी सोच के कारण संविधानसभा का अवसान हुआ । दुसरे संविधानसभा में प्रथम संविधानसभा द्धारा सम्पादित कार्यो को ग्रहण करते हुए अन्तरिम संविधान २०६३ की मर्म भावना अनुसार पुरा करना था परन्तु कांग्रेस एमाले के बर्तमान अवस्थामे दो तिहाई सदस्य संख्या के अहंकार के कारण एनेकपा माओवादी के साथ कि गई १२ सुत्रीय समझदारी, मधेश आन्दोलन, थारु आन्दोलन, मुस्लिम, दलित, पिछडावर्ग तथा अन्य जनजाति के आन्दोलन के दौरान राज्यद्धारा किये गए सम्झौता तथा अन्तरिम संविधान की मर्म एवं भावना को समाप्त करने मे लगी हुयी है । प्रथम संविधान सभा मे सहमति द्धारा संविधान निर्माण की रटान रटने वाली नेपाली कांग्रेस और एमाले दुसरी संविधान सभा मे सभी सहमति समझदारी को ताक पर रख कर बहुमतीय प्रक्रिया से संविधान निर्माण मे लगी हुयी है । सभामुख ने अपने को कांग्रेस एमाले पार्टी के प्रवक्ता के रुप मे प्रस्तुत कर बहुमतीय प्रक्रिया को आरम्भ कर मधेशी जनजाति सहित संघीयतावादी पार्टीको आन्दोलन करने के लिए बाध्य कर दिया है ।
संविधान सभाको वैरेकीकरण कर लोकतन्त्र की मूल्य मान्यताका माखौल उडाया है । मधेश विद्रोह द्धारा स्थापित स्वायत मधेश प्रदेशको सर्वसहमती से स्वीकार कर अन्तरिम संविधान २०६३ का अंग बनाने मे सहमती करने वाली नेपाली कांग्रेस एमाले आज अपने पुराने सहमती से पिछे हट रही है । शोषण उत्पीडन के विरोध मे हजारो हजार क्रान्तिकारीयों ने शहादत दिया है ।
कांग्रेस एमाले द्धारा प्रस्तुत ९ बँुदे प्रस्ताव के कार्यान्वयन से मधेश टुकडे टुकडे मे विभाजित होती है । तथा पहाड के पहिचान सहित के स्वशासन किसी भी प्रदेशको नही हो पा रही है । देश की अग्रगमन कार्य एवः पुर्नसंरचना की दिशा, मधेश आन्दोलन द्धारा अन्तरिम संविधान २०६३ मे स्वायत मधेश प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था संविधान की धारा १३८ (१)(क) अनुसार निर्देशित हो चुकी है । सद्भावना पार्टी विगत के सम्झौता और अन्तरिम संविधानको आधार मान कर सहमति के आधार पर संविधान सभा से पहिचान सहित की संघीयता और संघीयता सहित का संविधान निर्माण के पक्षधर है । सद्भावना पार्टी ३० दलीय मोर्चा के साथ राज्य पुनःसंरचना आयोग द्धारा बहुमत के प्रस्ताव अनुसार सिफारिस किए गए १० प्रदेश की पक्षधर है ।
संसार मे बहिष्कृतो की मांगो को सदन नही बल्की सडक द्धारा संवोधित होता चला आ रहा है । सदन आन्दोलन की उपलब्धीयों को संवैधानिक तथा कानुनी रुप देती है । मधेश आन्दोलन द्धारा स्थापित अन्तरिम संविधान मे राज्य के द्धारा किया गया २०६४ साल फाल्गुन १६ गते मधेश प्रदेश की प्राप्ती के लिए हम दृढ संकल्प है । झापा से लेकर कंचनपुर तक की मधेश की सम्पूर्ण भूभाग मधेश (तराई) प्रदेश का अभिन्न अंग है । इस बातको दृढता के साथ यह वैठक दोहराती है ।
‘स्वायत मधेश प्रदेश’ सुनिश्चितता के लिए जनता को सुसुचित करते हुये अपने अधिकारो की स्थापना के लिए सडक संघर्ष के लिए आवहान करना हमारी नैतिक एवं बाध्यात्मक जिम्मेवारी आ पडी है । सरकार द्धारा बहुमतीय प्रक्रिया को स्थगित करने से ३० दलीय मोर्चा ने भी फाल्गुन ३० गते तक दुसरे चरण के आन्दोलन को स्थगित
रखा तथा सरकार पक्ष कांग्रेस एमाले से सहमती के लिए बार्ता प्रारम्भ की परन्तु कांग्रेस एमाले द्धारा विगत कार्तिक १७ गते के अपने पुराने ९ बुँदे प्रस्ताव का दोहाराये जाने से काग्रेस एमाले की सहमती की नियत ही नही दिखायी पडी तथा बाध्य होकर ३० दलीय मोर्चा को चैत्र ५ गते से संघर्ष की घोषणा करनी पडी है ।
सद्भावना पार्टी इस देशमे संघीयता की जन्मदाता है जिसे देश की सभी पार्टी ने स्वीकार भी किया है । संघीयता की भावना एवं सिद्धान्तको त्याग कर कांग्रेस एमाले संघीयता के निर्णायक मोड पर विकृत संघीयता के पक्ष मे लगी हुयी है । ऐसी अवस्था मे सद्भावना पार्टी और पार्टी पंक्ती के समग्र नेता, कार्यकर्ता तथा आम जनताद्धारा विगत के सहमती अनुसार के संघीयता के लिए जारी आन्दोलनको निष्कर्स पर पहुचाने के लिये आवश्यकता पडने पर संविधान सभा की सदस्यता भी त्याग करने के लिये पार्टी तैयार है ।
जनता के जीवन से जुडा सवाल के लिए संघर्ष ः
३० दलीय मोर्चा द्धारा घोषित विषयो के साथ साथ स्थानीय समस्या को भी हमे छलफल के माध्यम से चिन्हित करके जनजिविका के लिये भी संघर्ष करना होगा । जैसे ः
१. गन्ने के मुल्य तथा भुक्तानी पर स्थानिय स्तर पर दबाबमुलक कार्यक्रम तय करना साथ ही सभी कृषी उपजो का उचित मूल्य निर्धारण एवं खरीद व्यवस्था हेतु संघर्षका कार्यक्रम तय करना ।
२. बालु गिटी का भण्डारण कर वितरण की सरकारी व्यवस्था के विरोध मे कार्यक्रम करना ।
३. सरकार द्धारा ७० प्रकार के दबाईयो की प्राथमिक सेवा केन्द्र मे उपलब्ध करने के लिए दबाब का कार्यक्रम तय करना ।
४. भन्सार कार्यालय से १००० रुपये तक सामान लाने की छुट जारी है लेकिन इस सुविधा से बंचित कर सुरक्षा निकाय द्धारा किये जा रहे बल प्रयोग का विरोध करना ।
५. बार्ता मे आये सशस्त्र समुह के माँग तथा सम्झौता कार्यान्वयन सम्बन्ध मे सरकारको दबाब देना ।
६. आन्दोलन के क्रम मे जनजिवीका से सम्बन्धित विषयो मे पार्टी द्धारा गाँव गाँव मे राहत समिति का निर्माण करना ।
७. संविधान का निर्माण २÷३ की सदस्य संख्या के वल पर जबरदस्ती सहमति के विरोध मे यदी होता है तो मधेश से निर्वाचित सदस्यो की जवाफ देहिता का माहौल निर्माण करना ।
८. सवारीचालक प्रमाणपत्र वितरण की व्यवस्थ मधेश मे अविलम्ब कराने के लिए सम्बन्धित जिले मे आन्दोलन कर दबाब सृजना करने का कार्यक्रम तय करना ।
९. किसानो को मल खाध दिलाने के सम्बन्ध मे हो रही परेशानी से राहत दिलाने के संवन्ध मे पार्टी को अपनी भूमिका निर्वाह करने के लिए कार्यक्रम तय करे ।
१०. यूवा जनशक्ति विदेश जाते समय अधिक व्याज मे कर्ज लेकर असुरक्षित वैदेशिक रोजगारी पर जाने के लिए बाध्य है जिस पर पार्टी के नेता ध्यान दे और उन्हे बैकों के माध्यम से कम व्याज मे कर्ज दिलाने मे सहयोग करने की भूमिका करवाये साथ ही सुरक्षित वैदेशिक रोजगार दिलाने मे पार्टी नेता को जिम्मेवारी ग्रहण करने का रुपमे तैयार करना । और अलग से श्रमिक वैंक स्थापना हेतु संघर्ष करना ।
११. सरकार द्धारा मालपोत, नापी कार्यालय जैसे सेवा केन्द्रो का अब्यवहारिक ढंग से आवश्यकता वाली क्षेत्र मे न कर सिर्फ उत्तरी क्षेत्र मे सिफट करने की सरकारी नीति का पार्टी पंक्ति द्धारा विरोध करना ।
१२. सामुदायिक वन के तर्ज पर मधेश मे रहे भन्सार कार्यालय से राजस्व की असुली पर अपने अधिकार की घोषणा करने के समर्थन मे वातावरण निर्माण करना ।
१३. हाल ही सरकार द्धारा विभिन्न ५ आयोग मे २९ नियुक्तियो मे २१ नियुक्ती सिर्फ खस ब्रामहण लोगो की है उसमे भी जनता को सुसुचित कर अपने अधिकार के प्रति सचेततना पैदा करना ।
१४. राष्ट्रपति चुरे भावर के कर्मचारी द्धारा चुरे भावर के ओर स्थलगत निरिक्षण करने समय राजमार्ग वैठे लोगो के पास लाल पुर्जा अथवा धनी पुर्जा नही है सरकार की नीति और कार्यशैलीको गाव गाव मे उजागर करने का कार्यक्रम करना । इसी तरह स्थानिय कार्यक्रमो के प्रत्येक जिला द्धारा चिन्हित कर केन्द्र को जानकारी कराते हुये राष्टीय विषयो के साथ अथवा अलग से भी आन्दोलन अथवा असहयोग का कार्यक्रम को तय कर कार्यान्वयन करे ।
१५. सम्बन्धित जिलो की सम्पूर्ण नागरिको का वन जंगल पर पहुच हो इस लिए समुदायिक वन खारेज कर साझेदारी वन लागु करवाने हेतु संघर्ष करना ।
१६. स्थानिय विकास मन्त्रालय द्धारा उपभोक्ता समिति मार्फत विकास खर्च के नाम पर अर्बो का बजेट का भ्रष्टाचार विरुद्ध आन्दोलन करना ।
१७. माता पिता का जन्मसिद्ध नेपाली नागरिकता होने पर भी उसके सन्तानको नेपाली नागरिकता नही देने का षडयन्त्र विरुद्ध संघर्ष करना ।
१८. देश मे निरन्तर हो रहे महिला उपर बलत्कार तथा हिसां विरुद्ध विभिन्न तरह के जनजागरण एवं अभियान चलाना ।
१९. सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर मधेश मे सुरक्षाकर्मीयों द्धारा दिनानुदिन हो रहे उत्पीडन से मधेशी जनता पिडित है । पार्टी की यह वैठक किए जा रहे उत्पीडन एवं गैर न्यायिक हत्या का विरोध करती है ।
२०. पंचायती शासक द्धारा सिर्फ ३ जिला नवलपरासी, रुपन्देही, कपिलवस्तु मे उरवडा कानुन लागु करने से जमिन जोत्नेवाले तथा जग्गाधनी के विच विवाद के कारण जमिनका नापी होते समय जमीन दर्ता नही हो पायी । विवाद के अन्तिम फैसले के वाद भी जमिन दर्ता करने का कार्य बहुत लोगो का अभितक बाकी पडा हुआ है । अतः सरकारी जमिन दर्ता करने का कार्य अविलम्ब करने हेतु आवश्यक कार्यक्रम करना ।
जनजिविका का सवाल एवं स्थानीय विषयो का मुद्दा के उपर संघर्ष करना अती आवश्यक दिख रही है । अतः जनमैत्री कार्यक्रम को प्राथमिकता के साथ पार्टी को स्थानीय स्तर पर उठाने एवं संघर्ष को उत्कर्ष मे पहुचाने हेतु जि.वि.स. नगरपालिका मे पार्टी प्रतिनिधित्व छोडकर संघर्ष के लिए पार्टी के सभी स्थानीय समिति एवं वर्गिय संगठनको यह वैठक निर्देश करती है । इससे पार्टी जनमैत्री बनेगी और समुल रुप से संविधान निर्माण के लिये जनदबाब अथवा जनआन्दोलन सफलतापुर्वक पार्टी सम्पन्न करने मे सफल होगी ।
प्रस्ताव नं. २ सांगठनिक प्रस्ताव ः
१. विधान अनुरुप पार्टी के सभी तह के कार्यसमिति, भातृसंगठन समेतका नियमित वैठक हेतु यह वैठक निर्देशन देती है ।
२. गाँव से लेकर केन्द्रीय तह के निष्कृय समितियों को सक्रिय बनाने हेतु विशेष अभियान के तहत (गठन एवं पुर्नगठन) करने हेतु यह वैठक निर्णय करती है ।
३. पार्टी से निष्कृय नेता कार्यकर्ताको क्रियाशिल एवं सक्रिय बनाना तथा सक्रिय कार्यकर्ताओका मूल्यांकन हेतु पार्टी निम्न उपायो का अवलम्बन करने की यह वैठक निर्णय करती है ।
क. कार्यमूल्याकंन फारम — पार्टी के सभी तह के सभी सांगठनिक सदस्य, नेता, कार्यकर्ता कार्यमूल्यांकन फारम नियमित रुप से भरे तथा अपने से उपर के समिति मे रिर्पोटिङ्ग करे । कार्यमूल्यांकन फारम पार्टी केन्द्रीय सचिवालय द्धारा उपलब्ध कराने की निर्णय किया जाता है ।
ख. कार्यप्रगति विवरण फारम — किसी भी तह का समिति अपने महिने भरका कार्यसम्पादन एवं कार्यप्रगति का विवरण निश्चित ढाचा मे अपने से उपर के समिति मे नियमित रुप से कार्यप्रगति विवरण फारम भरके प्रेषित करे ।
ग. उपस्थिती रजिष्टर ः पार्टी द्धारा आयोजित वा संलग्नतावाली किसी भी कार्यक्रम (आन्दोलन, भेला, वैठक, छलफल, गोष्ठी, सेमिनार) आदीका उपस्थिती रेकर्ड सम्बन्धित समिति द्धारा अपने से उपर के समिति मे प्रेषित करे ।
४. पार्टी विधान अनुसार विना सुचना लगातार वैठक मे अनुपस्थित पदाधिकारी एवं सदस्यों को अनिवार्य रुप से विधान के दायरा मे लाने का निर्णय किया गया ।
५. पार्टी का जिला अधिवेशन ः पार्टी के विधान अनुसार पार्टी जिला अधिवेशन की प्रक्रिया को अविलम्व आगे बढाने के लिए यह वैठक निर्णय करती है ।
६. पार्टी चुस्त दुरुस्त एवं अत्याधिक सक्रिय एवं सवल बनाने हेतु सभी वर्गीय मंचोका महाधिवेशन अनिवार्य है । अतः जितना जल्द अविलम्व महाधिवेशनका तिथि तय करने हेतु सभी वर्गिय मंच के केन्द्रीय समिति को यह वैठक निर्देशन देती है ।
७. सभी तह के समितिया मे अनिवार्य रुप से लेबी संकलन की व्यवस्था करने हेतु यह वैठक निर्देश करती है । और कार्य समिति अपने उपर भी लेबी के लिए निर्णय करती है ।
८. पार्टी की वैचारिक मुखपत्र नियमित प्रकाशन हेतु यह वैठक निर्णय करता है ।
निर्णय नंं ३ एकीकरण के विषय में
संविधानसभा निर्वाचन २०७० के जनादेश, मधेशी, जनता की भावना इच्छा तथा आकांक्षा अनुरुप सद्भावना परिवार सहित मधेश केन्द्रीत राजनीतिक दलों विच पार्टी तथा साथीयो के वीच एकीकरण हेतु यह वैठक सम्बन्धित सभीको आवहान करती है । उक्त कार्य हेतु निम्न अनुसार की कार्यदल गठन करने का यह वैठक निर्णय करती है ।
१. मा. लक्ष्मण लाल कर्ण सहअध्यक्ष
२. श्री मनिष कुमार सुमन महासचिव
३. श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव सहमहासचिव
४. श्री संतोष मेहता प्रवक्ता
५. श्री योगेन्द्र राय यादव केन्द्रीय सदस्य
निर्णय नंं ४ ः आन्दोलन सम्बन्ध में
१. सद्भावना पार्टी सम्मिलित ३० दलीय गठबन्धनद्धारा घोषित दुसरे चरणका आन्दोलनको सफल बनाने हेतु पार्टी के सभी निकायो मे सक्रिय सहभागिता के लिए निर्देश करती है । साथ ही स्थानीय स्तरका मुद्दाका समेत प्राथमिकता देने के लिए पार्टी निर्देश करती है ।
२. झापा, मोरंग, सुनसरी, कैलाली, कंचनपुर मे जारी संघर्ष के कार्यक्रम को और भी अधिक सशक्त ढंग से आगे बढानेका यह वैठक निर्देश करती है ।
३. ३० दलीय मोर्चा द्धारा घोषित आन्दोलन मे सद्भावना पार्टी का प्रभावकारी भूमिका निर्वाह के लिए पार्टी द्धारा आन्दोलन परिचालन के संयोजक द्धारा गठित समिति सदस्यों को नामावली भेज कर उन्हे सक्रियतापूर्वक आन्दोलन मे भाग लेने का निर्देश करती है ।
४. ३० दलीय गठबन्धन द्धारा घोषित आन्दोलनको प्रभावकारी ढंग से संचालन के लिए पार्टी पदाधिकारीयों द्धारा प्रत्येक जिला मे प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्पन्न करने का निर्णय करती है ।
निर्णय नंं ५
शोषित, पिडित तथा भेदभाव से ग्रसित मधेशी, दलित, जनजाति, थारु, मुस्लिम, महिला सहितको अधिकार सम्पन्न संघीय संविधान निर्माण नही होने तक संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा द्धारा सरकार मे नही जाने का निर्णय के प्रति सद्भावना पार्टी दृढता व्यक्त करती है ।
निर्णय नंं ६ ः विविध
राज्यद्धारा राजनीतिक द्धेष एवं पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर मा. संजय साह सहित २९ लोगो की सम्पती प्रारम्भिक अनुसन्धान के विना रोक्का करने के कार्य को संसद के निर्देशानुसार आवश्यक छानवीन पश्चान सुशासन तथा अनुगमन समिति को दिए गए प्रतिवेदन अनुसार मा. संजय साह सहित सभी २९ लोगो की गैर कानुनी ढंग से रोकी गई सम्पती को अविलम्ब फुकुवा करने की मांग करती है ।
(मनिष कुमार सुमन)
महासचिव
मिति ः २०७१ चै त्र १२


तपाईको प्रतिक्रिया